सुगम्य भारत अभियान, भारत में विकलांग लोगों की मदद करने के लिए भारत सरकार द्वारा चलाए जाने वाला एक अभियान है। ये सुलभ भारत अभियान के रूप में भी जाना जाता है, जो देश को असक्षम (विकलांगों) का अनुकूल देश बनाने के लिये और अधिक आर्थिक वृद्धि प्राप्त करने के लिये शुरु किया गया है।
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सुगम्य भारत अभियान या एक्सेसिबल इंडिया कैंपेन, 3 दिसम्बर 2015 को भारत के प्रधानमंतारी नरेन्द्र मोदी के द्वारा विज्ञान भवन, नई दिल्ली में शुरु किया गया था। इस अभियान को भारत में विकलांग लोगों को बराबर पहुँच प्रदान करने के लिए विशेष रूप से शुभारंभ किया गया हैं। ये अभियान 3 दिसम्बर को शुरु किया गया, जो पूरे विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस के रुप में मनाया जाता हैं। ये अभियान 50% सरकारी भवनों (चाहे वो राजधानी में हो या राज्यों में) को जुलाई 2018 तक विकलांग लोगों के लिये पूरी तरह से सुलभ बनाने के उद्देश्य को पूरा करने के लिये शुरु किया हैं।
कातिबेनला, 100% गति विकलांगता से पीड़ित एक 9 साल की बच्ची, को 3 दिसम्बर (विश्व विकलांगता दिवस) को नई दिल्ली विज्ञान भवन में राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया गया। वो खेंसा गाँव, जिला मोकोकचुंग, नागालैंण्ड से हैं और सबसे सृजनात्मक विकलांग बच्चे के रुप में देश में नि:शक्त व्यक्ति काs सशक्तिकरण पुरुस्कार के लिये चुनी गयी थी। ये पहल भारत सरकार का एक महत्वाकांक्षी कदम है जिसका उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों की सार्वभौमिक पहुँच को सुलभ बनाकर उन्हें विकास के समान अवसर प्रदान करना। ये अभियान उनके जीवन के लगभग सभी पहलुओं पर सक्रिय भागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भरता से जीवन जीने में मदद करेगा।
भारत के प्रधानमंत्री ने अपना भाषण ये कहते हुये शुरु किया कि सभी स्मार्ट शहरों को भविष्य में नि:शक्त व्यक्ति के लिए पूर्ण पहुंच की योजना के साथ बनना चाहिए। विकलांग लोगों के बारे में लोगों की सोच के तरीके में बदलाव लाने के लिए, प्रधानमंत्री ने ‘विकलांग’ शब्द को ‘दिव्यांग’ से बदलने के लिये विचार करने को कहा है। ये पहल भविष्य में “सबका साथ, सबका विकास” के नारे को सही अर्थों में पूरा करेगी।
परिचय
एक्सेसिबल इंडिया कैंपेन या सुगम्य भारत अभियान, भारत सरकार द्वारा अलग-तरह से सक्षम व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार करने के लिये शुरु की गयी पहल है। ये कार्यक्रम असक्षम अनुकूल इमारतें और अन्य सार्वजनिक स्थानों को बनाने के लिये शुरु किया गया है। ये 3 दिसम्बर 2015 को नई दिल्ली में शुरु किया गया। ये कार्यक्रम असक्षम या विकलांग लोगों के लिये समर्पित हैं। यही कारण हैं कि इसे अन्तर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस पर शुरु किया गया।
इस अभियान के लक्ष्य
इस अभियान का उद्देश्य विकलांगों और असक्षमों के लिये सार्वजनिक स्थानों पर सुलभ आसान पहुँच प्रदान करना है। 2011 की जन-गणना के अनुसार, लगभग 21 मिलियन भारतीय (कुल जनसंख्या का 2.21%), विकलांगता से पीड़ित है।
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पूरे भारत में लगभग पचास प्रतिशत सरकारी इमारतों और 25 प्रतिशत सरकारी परिवहनों, वाहनों को 2016 के अन्त और 2017 के मध्य तक विकलांगों के अनुकूल बनाने का लक्ष्य रखा हैं। इस कार्यक्रम के बारे में बड़े लक्ष्यों के साथ आगे का विकास बाद के वर्षों में जारी रखा जाएगा। 2018 तक, लगभग समग्र वातावरण विकलांग लोगों के लिए और अधिक व्यापक हो जाएगा। ये अनुमान लगाया गया है कि जुलाई 2016 तक देश में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डें और रेलवे स्टेशन (ए1, ए और बी श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले) विकलांग के उपयोग के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगें। ये उन्हें अन्य सामान्य जनता की तरह समान अवसर प्रदान करेगी।
आम नागरिकों के लिये सरकारी इमारत की पहुंच के बारे में अपने विचार अपलोड करने के लिये ऑनलाइन वेबसाइटों और मोबाइल एप्लिकेशन विकसित करने की योजना भी हैं। देखने में असक्षम लोगों के लिये विशेष सेट टॉप बॉक्स उपलब्ध कराये जायेगें जो उनके टीवी देखने को और अधिक सुविधाजनक और आसान बनायेगा। अगले 5 सालों में टीवी पर सरकार चैनलों के माध्यम से संकेत भाषाओं में बात करने के लिए लगभग 200 विकलांग व्यक्तियों को प्रशिक्षित करने के लिए भी योजना बनाई गई है (संचार की एक प्रणाली जो दृश्य इशारों और बहरे लोगों को पढ़ाने के लिए संकेत का उपयोग करता है)। ये निजी कंपनियों को भी अलग विकलांगों के लिए ‘पहुंच सूचकांक’ मानकों को पूरा करने के लिए लक्ष्य बनाया गया है।
निष्कर्ष
विभिन्न क्षेत्रों की निजी कम्पनियाँ भी (जैसे टेक्सटाइल्स़, निर्माणी कम्पनियाँ, आदि) को भी उनके प्रशिक्षण और कैरियर के विकास के लिए अलग तरह से सक्षम कर्मचारियों के लिए सुविधाओं की गुणवत्ता में निवेश के अनुसार एक से दस तक की रेंकिंग प्रदान की जायेगी। विकलांग और असक्षम लोगों को औद्योगिक क्षेत्र में लाने के लिये ये सरकार द्वारा उठाया गया बहुत बड़ा कदम है जो दो तरफा फायदा रखता हैं विकलांगों की आजीविका वृद्धि और देश का आर्थिक विकास।
परिचय
प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी ने 3 दिसम्बर 2015 को विज्ञान भवन, दिल्ली में एक पहल शुरु की हैं जिसे सुगम्य भारत अभियान (एक्सेसिबल इंडिया कैंपेन भी कहा जाता हैं) कहा जाता हैं। ये विशेष रुप से विकलांग व्यक्तियों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर शुरु किया गया जो पूरे संसार में 3 दिसम्बर को मनाया जाता हैं। ये भारत सरकार द्वारा भारत को विकलांगों के अनुकूल देश बनाने के लिये उठाया गया बहुत ही सक्रिय कदम है। इस अभियान का आत्मिक उद्देश्य पूरे देश में विकलांगों को शक्ति प्रदान करके उनके रोजगार में वृद्धि करके आर्थिक वृद्धि को बढ़ाना है।
सुगम्य भारत अभियान के उद्देश्य और कार्य योजना
इस अभियान के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:
इस अभियान की कार्य योजना है:
इस अभियान का मुख्य लक्ष्य अनुकूल वातावरण, सूचना और संचार पारिस्थितिकी तंत्र, और परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना हैं। लोगों के बीच जागरुकता फैलाने के लिये, सूचना प्रौद्योगिकी, सामाजिक मीडिया और अन्य ऑनलाइन उपकरण का प्रयोग करना होगा। नागरिक-केन्द्रित सार्वजनिक वेबसाइटों को विकलांगों के लिये अनुसार परिवर्तित करने की योजना है। अस्पतालों, पुलिस स्टेशनों, पर्यटन-स्थलों आदि पर पहुँच को सुलभ बनाने और गृह मंत्रालय, परिवार कल्याण मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, सूचना और संचार व प्रसारण मंत्रालय के टीवी प्रसारण के लिये पहुँच को बढ़ाने के लिये आपसी सहयोग से कार्य करना हैं।
निष्कर्ष
इस अभियान सहित मोदी सरकार द्वारा लागू किये गये अन्य बहुत से अभियान हैं। उनमें से बहुत से अगले पाँच वर्षों में पूरा होने की समय अवधि रखते हैं। इस अभियान को भी अगले पाँच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान का उद्देश्य विकलांग या असक्षम व्यक्तियों को सार्वभौमिक सुलभता, सुलभ अधिकार प्रदान करके आत्मनिर्भर जीवन जीने के योग्य बनाना हैं। जैसा कि हम पहले अभियानों के शुरु करने की सकारात्मक प्रतिक्रिया को देख चुके हैं, उस आधार पर इस अभियान के सफल होने पर कोई संदेह नहीं है। ये समाज के विकलांग व्यक्तियों के लिये और अधिक सुलभ आधारभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराकर उनके जीवन को वास्तव में स्वतंत्र बनायेगा।
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परिचय
सुगम्य भारत अभियान, सुलभ भारत अभियान (एक्सेसिबल इंडिया कैंपेन) के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि ये विकलांग लोगों के लिये समान सुविधाओं के लिए आसान पहुँच प्रदान करता है। ये कदम भारत सरकार द्वारा विकलांग लोगों द्वारा झेली जा रही बड़ी समस्या को हल करने के लिए लिया गया है। ये अभियान पूर्ण गरिमा के साथ शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य देखभाल, परिवहन, खेल, मनोरंजन, और कई और अधिक के समान अवसर उपलब्ध कराने के लिये विकलांग लोगों के लिए सार्वभौमिक पहुँच प्राप्त करने के उद्देश्य से शुरु किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में विकलांग व्यक्तियों को दिव्यांग (असाधारण क्षमताओं के लोग) कहकर संबोधित किया था न कि विकलांग।
सुगम्य भारत अभियान क्या हैं
सुगम्य भारत अभियान भौतिक वातावरण को विकलांगों के लिये सुलभ, सहज और सहने योग्य बनाने के उद्देश्य से शुरु किया गया है। ये विकलांग लोगों के लिए सार्वजनिक स्थानों, परिवहन, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी की पहुंच के साथ-साथ प्रयोज्य (उपयोग को) बढ़ाने के लिए है।
सुगम्य भारत अभियान के लक्ष्य
इस अभियान के प्रमुख लक्ष्य निम्नलिखित हैं:
इस अभियान के सफल होने की संभावनाएं
इस अभियान को सही दिशा में कार्यान्वित करने के लिये सरकार द्वारा कार्य योजना तैयार की गयी हैं। यहाँ इस पहल की कार्य-योजना के कुछ संकेत दिये गये हैं:
कार्य-योजना बन चुकी हैं और ये विकलांग और असक्षम लोगों की उत्पादकता के साथ ही साथ देश के लिये आर्थिक सहयोग में वृद्धि करने के लिये बहुत जल्द लागू भी हो जायेगी। इस अभियान के सफल और प्रगतिशील होने में कोई भी संदेह नहीं है। ये वास्तविकता में अपनी कार्य-योजना के अनुसार सभी लक्ष्यों और उद्देश्यों की प्राप्ति करेगा।
निष्कर्ष
भारत में विकलांग लोग आज भी पिछड़े हुये हैं क्योंकि वो सार्वजनिक स्थानों, भवनों, कार्यालयों, स्कूलों, सड़कों, रेलवे स्टेशनों, हवाई-अड्डों, मेट्रों आदि तक उनकी पहुँच नहीं है। वो शारीरिक रुप से अपनी व्हील चैयर को इस तरह के स्थानों पर नहीं ले जा सकते। समाज का एक होनहार व्यक्ति होने के बाद भी उनका जीवन बहुत कम स्थानों तक सीमित होता है। यह पहल सच में विकलांगता के किसी भी प्रकार से पीड़ित सभी व्यक्तियों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी। यह उन्हें बहुत आसानी से सभी सुविधाओं तक पहुँचने के द्वारा आगे जाने के लिए समान अवसर प्रदान करेगी। इस अभियान के माध्यम से, वो अपने कैरियर को विकसित कर सकते हैं, आत्मनिर्भर हो सकते है और साथ ही साथ देश की अर्थव्यवस्था में भी योगदान कर सकते हैं।